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Saturday, 15 March 2014

फूल और ओस

होली के अवसर पर हार्दिक शुभ कामनाएं |

(१)
 फूल क्या जिसने
 ओस से प्यार न किया हो
भावों में बह कर उसे
बाहों में न लिया हो |
(२)
टपकती  ओस
ठिठुरन भरी सुबह की धुप
देखे बिना चैन नहींआता
ओस में नहाया पुष्प
अनुपम नजर आता |
(३)
फूलों की फूलों से बातें
 कितनी अच्छी लगती हैं
प्यार भरी ये सौगातें
मन को सच्ची लगती हैं |

6 comments:

Kailash Sharma said...

बहुत सुन्दर और प्रभावी रचना...होली की हार्दिक शुभकामनायें!

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज रविवार (16-03-2014) को "रंगों के पर्व होली की हार्दिक शुभकामनाएँ" (चर्चा मंच-1553) पर भी है!
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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रंगों के पर्व होली की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Asha Saxena said...

होली पर हार्दिक शुभ कामनाएं|
आशा

मन के - मनके said...

फूलों से फूंलों की बातें अच्छी लगतीं है---
प्यार भरी सौगात----
थोडे शब्दों में गागर भावों की.

surendrshuklabhramar5 said...

बहुत सुन्दर रचना...होली की हार्दिक शुभकामनायें.....

surendrshuklabhramar5 said...

बहुत सुन्दर रचना...होली की हार्दिक शुभकामनायें.....