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Tuesday, 22 October 2013

करवा चौथ पर

करवा चौथ पर हार्दिक शुभ कामनाएं 
चाँद ने मुह छिपाया
बादलों की ओट में
प्रिय तुम भी
अब तक न आए
जाने कहाँ विलमाए
मैं हूँ परेशान
कब तक राह निहारूं
तुम्हारी और  चाँद की
याद नहीं आई  क्या 
आज करवा चौथ की|
आशा
सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः

6 comments:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (23-10-2013)   "जन्म-ज़िन्दग़ी भर रहे, सबका अटल सुहाग" (चर्चा मंचःअंक-1407)   पर भी होगी!
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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करवा चौथ की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

sadhana vaid said...

मन को छूती सुन्दर्सार्थक रचना ! बहुत सुंदर !

कालीपद प्रसाद said...

बहुत सुन्दर |
नई पोस्ट मैं

Pratibha Verma said...

प्रिय तुम भी
अब तक न आए
जाने कहाँ विलमाए
बहुत सुन्दर प्रस्तुति। ।

Asha Saxena said...

आपलोगों को टिप्पणी हेतु धन्यवाद |

Rajeev Kumar Jha said...

बहुत सुन्दर .
नई पोस्ट : उत्सवधर्मिता और हमारा समाज