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Friday, 9 November 2012

दीपावली


टिमटिमाते तारे गगन में
अंधेरी रात अमावस की
दीपावली आई तम हरने
लाई सौगात खुशियों की |
कहीं जले माटी के दीपक
रौशन कहीं मौम बत्ती
चमकते लट्टू बिजली के
विष्णु प्रिया के इन्तजार में |
बनने लगी मावे की गुजिया
चन्द्रकला और मीठी मठरी

द्वार खुला रखा सबने
स्वागतार्थ लक्ष्मी के |
आतिशबाजी और पटाखे
हर गली मोहल्ले में
नन्ही गुडिया खुश होती
फुलझड़ी की रौशनी में |
समय देख पूजन अर्चन
करते देवी लक्ष्मी का
खील बताशे और मिठाई
होते प्रतीक घुलती मिठास की
|
दृश्य होता मनोरम
तम में होते प्रकाश का
होता मिलन दौनों का
रात्री और उजास का |
प्रकाश हर लेता तम
फैलाता सन्देश स्नेह का
चमकता दमकता घर
करता इज़हार खुशियों का |
सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः

2 comments:

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

आदरणीया आशा जी बहुत सुन्दर रचना सुन्दर सन्देश और शुभ कामना के साथ , आप सभी मित्रों का जीवन जगमगाता रहे समाज रोशन हो सब को सद्बुद्धि आये ...
जय श्री राधे
भ्रमर ५

Asha Saxena said...

भ्रमर जी आपको भी सपरिवार दीपावली की हार्दिक शुभ कामनाएं