AAIYE PRATAPGARH KE LIYE KUCHH LIKHEN -skshukl5@gmail.com

Wednesday, 28 December 2022

अच्छा लगता सब कुछ जैसे मां की लोरी


अच्छा लगता सब कुछ- जैसे माँ की लोरी
---------------------------------------
गिरि की खोह से निकला सूरज
स्वर्ण रश्मियाँ ज्यों सोना बरसाईं
हुआ उजाला चमक उठा सब
चिड़ियाँ चहकीं अंगड़ाई ले जागा नीरज
------------------------------------------
खिले फूल बहुरंगी प्यारे
खिले-खिले हर चेहरे न्यारे
रंग बिरंगी तितली मन को चली उड़ाए
पंख लगा मन भर 'कुबेर' सा फूल रहा रे !
----------------------------------------
बहुत सुहानी मन-हर वायु जैसे अमृत
नदी पहाड़ से उड़ -उड़ आती
जान फूंक देती प्राणी या कोई चराचर
हिंडोले में सावन जैसे गजब झुलाती !
------------------------------------------
आओ घूमें उठ के सुबह सवेरे नित ही
भरें ऊर्जा ओज योग आसन में रम जाएँ
भौतिक से कुछ सूक्ष्म जगत परमात्म ओर भी-
मन लाएं ! सुंदर सुविचार कर्म क्षेत्र ले जुट जाएँ
------------------------------------------------------
घर आँगन परिवार हमारे सखा -सहेली
कितने प्यारे मन को सारे लगे दुलारे
अच्छा लगता सब कुछ जैसे माँ की लोरी
संयम साहस संस्कार ले जीत जहां रे !
------------------------------------------
आओ अपना लें सब अच्छा दुर्गुण छोड़ें
सच ईमान को अंग बना लें रहें ख़ुशी
दिव्यानंद समाये मन में हाथ मिला लें
सब को गले लगा रे प्यारे , ना धन-निर्धन दीन दुखी
=====================
सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर 5
उत्तरप्रदेश, भारत

सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः

1 comment:

Rupa Singh said...

प्रकृति की सुंदर रचना👌👌