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Monday, 23 December 2013
सांता क्लॉस
Wednesday, 11 December 2013
क्षणिकाएं ( भाग २)
सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः
क्षणिकाएं (भाग २)
मन से मन की बात यदि ना हो पाए
मन चाही मुराद यदि मिल न पाए
मन दुखी तब क्यूं न हो
बेमौसम का राग वह क्यूँ गाए |
(२)
सुनी गुनी कही बातें
वजन तो रखती हैं
पर हैं कितने लोग
जो उन पर अमल करते हैं |
(३)
पर देखी सिर्फ तानाकशी
खुशी गायब हो गयी
ज्ञान न था दिलों में
इतना विष घुला है
प्यार का तो ऊपरी दिखावा है
हर इंसान का दोहरा चेहरा है |..
(४)
(३)
मैंने सजाई थी महफिल
हंसने हंसाने को पर देखी सिर्फ तानाकशी
खुशी गायब हो गयी
ज्ञान न था दिलों में
इतना विष घुला है
प्यार का तो ऊपरी दिखावा है
हर इंसान का दोहरा चेहरा है |..
(४)
मधुमास में
पतझड़ की बातें
शोभा नहीं देतीं
खुशी के आलम में
उदासी भर देतीं |
आशा
पतझड़ की बातें
शोभा नहीं देतीं
खुशी के आलम में
उदासी भर देतीं |
आशा
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