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Friday, 9 April 2021

आज चांद का रंग कुछ बदला


आज चांद का रंग कुछ बदला , 
प्रिय ने शायद देख लिया ।
लाल तभी है मेरा मुखड़ा,  
नैन उतर दिल नेह किया ।।

सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर5



सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः

Thursday, 8 April 2021

कर सोलह श्रृंगार नटी ये


 कर सोलह श्रृंगार नटी ये

...…...……..........

नीले नभ पे श्वेत बदरिया

मलयानिल मिल रूप आंकती

हिमगिरि पे ज्यों पार्वती मां

सुंदरता की मूर्ति झांकती

……....….....

शिव हों भोले ठाढे जैसे

बादल बड़े भयावह काले

वहीं सात नन्हे शिशु खेलें

ब्रह्मा विष्णु सभी सुख ले लें

……..…............

निर्झर झरने नील स्वच्छ जल

कल कल निनादिनी सरिता देखो

हरियाली चहुं ओर है पसरी

स्वर्ण रश्मि अनुपम छवि देखो

…...................

कर सोलह श्रृंगार नटी ये

प्रकृति मोहती जन मन देखो

..…

श्वेत कबूतर ले गुलाब है

उड़ा आ रहा स्वागत कर लो

…...…........

फूल की घाटी तितली भौंरे

कलियों फूल से खेल रहे

खुशबू मादक सी सुगन्ध ले

नैन नशीले बोल रहे

......

पंछी कुल है हमें जगाता

कलरव करते दुनिया घूमे

छलक उठा अमृत घट जैसे

अमृत वर्षा हर मुख चूमे

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हहर हहर तरू झूम रहे हैं

लहर लहर नदिया बल खाती

गोरी सिर अमृत घट लेकर

रोज सुबह आ हमे उठाती

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ओस की बूंदें मोती जैसे

दर्पण बन जग हमे दिखाती

करें खेल अधरो नैनों से

बड़ी मोहिनी हमे रिझाती

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कहीं नाचते मोर मोरनी

झंकृत स्वर हैं कीट पतंगे

रंग बिरंगी अद्भुत कृति की

शोभा निखरी किस मुंह कह दें

,.....….........

मन कहता भर अनुपम छवि उर

नैन मूंद बस कुटी रमाऊं

स्नेह सिक्त मां तेरा आंचल

शिशु बन मै दुलराता जाऊं

..........

उठो सुबह हे! ब्रह्म मुहूरत

योग ध्यान से भरो खजाना

वीणा के सुर ताल छेड़ लो

क्या जाने कब लौट के आना ।

.........

सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर 5

प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश

भारत 8.4.2021




सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः

Tuesday, 6 April 2021

मुझको भी ले चल तू मुन्ना रंग बिरंगे सपनों में


नैन मूंद मत करे अकेला
मेरे जीवन का तू मेला
मुझको भी लेे चल तू मुन्ना
रंग बिरंगे सपनों में....

अंक भरूं मै चंदा मामा
सूरज चाचू को जल दे दूं
तारों संग कुछ कंचा खेलूं
नील गगन में सैर करूं
मुझको भी लेे चल तू मुन्ना......

परियों संग मै खेलूं कूदूं
सप्तऋषि संग वेद पढूं
परियों की जादुई छड़ी लेे
शक्तिमान बन खेल करूं
मुझको भी लेे चल तू मुन्ना.........

तितली बन मै फूल की घाटी
पर्वत चढ़ बादल से खेलूं
कामधेनु से मांग खिलौने
कल्पवृक्ष पे झूला झूलूं
मुझको भी लेे चल तू मुन्ना
रंग बिरंगे सपनों में....

नदियां सागर झील व झरने
हरे भरे जंगल में घूमूं
हाथी दादा हिरन मोर से
करूं दोस्ती सब सुख लेे लूं
मुझको भी लेे चल तू मुन्ना
रंग बिरंगे सपनों में....

गौरैया तोता बुलबुल संग
राजहंस बगुला संग उड़ लूं
ले प्यारे बच्चों की टोली
कान्हा संग मै माखन खाऊं
मुझको भी लेे चल तू मुन्ना
रंग बिरंगे सपनों में....

चलूं घुटुरुवन छुन्नुन छुन्नून
पैजनिया पैरन में पाऊं
उठूं गिरूं चीखूं चिल्ला के
मां की गोदी में छुप जाऊं
मुझको भी लेे चल तू मुन्ना
रंग बिरंगे सपनों में....

आंख बंद जब तू मुस्काए
तीन देव संग जग हंस जाए
अधर तुम्हारे जब रोने को
मातृ दे वियां सब दुलराएं
मुझको भी लेे चल तू मुन्ना.........

सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर 5
प्रतापगढ़, उत्तरप्रदेश, भारत



सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः